SB 10.55.34
स एव वा भवेन्नूनं यो मे गर्भे धृतोऽर्भक: ।
अमुष्मिन् प्रीतिरधिका वाम: स्फुरति मे भुज: ॥ ३४ ॥
अमुष्मिन् प्रीतिरधिका वाम: स्फुरति मे भुज: ॥ ३४ ॥
भावार्थ
Yes, He must be the same child I bore in my womb, since I feel great affection for Him and my left arm is quivering.
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