SB 10.51.9
एवं क्षिप्तोऽपि भगवान्प्राविशद् गिरिकन्दरम् ।
सोऽपि प्रविष्टस्तत्रान्यं शयानं ददृशे नरम् ॥ ९ ॥
सोऽपि प्रविष्टस्तत्रान्यं शयानं ददृशे नरम् ॥ ९ ॥
भावार्थ
Although insulted in this way, the Supreme Lord entered the mountain cave. Kālayavana also entered, and there he saw another man lying asleep.
तात्पर्य
The Lord exhibits here His opulence of renunciation. Determined to execute His plan and give His blessings to Mucukunda, the Lord ignored Kālayavana’s insults and calmly proceeded with His program.
बेस- पूरे विश्व में वैदिक संस्कृति सिखाने का लक्ष्य
©2020 BACE-भक्तिवेदांत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्था
www.vedabace.com यह वैदिक ज्ञान की विस्तृत जानकारी है जो दैनिक साधना, अध्ययन और संशोधन में उपयोगी हो सकती है।
अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें - info@vedabace.com